लघुकथा
माई- “अरे ई का कर रहे हो?”
बेटा- “माई, दहेज में मिला सारा समान समेट कर अपने कमरे में
सुरक्षित रख रहा हूँ |”
माई- ” क्यों? ये दहेज में मिला सामान तुम्हारा ही है…या हम पूरे
परिवार का……?”
बेटा- ” माई कल तक तो लग रहा था, ई पूरा सामान हमरे पूरे
परिवार के लिए है… लेकिन जब कल रात छोटकी(बहन)
को तुम समझा रही थी कि दहेज में जो सामान दिए हैं,उसे
अपने कमरे में रखना, तुमको दिए हैं…. तुम्हारे ससुराल
वालों को नहीं | तो हमको लगा कि हमारी पत्नी भी गलत
तो नहीं कर रही…..चलो वो तो नासमझ है, हमहीं सामान
समेट कर रख देते हैं | ”
माई- ” क्षमा करना बेटा, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई ….
अरे! मेरी बहू तो लक्ष्मी है | मेरी ही मति मारी गई जो कल
बेटी को एक कुलच्छिनी का गुण सीखा रही थी | “