लघुकथा….
मेहंदी…..
बहुत ही सुंदर रची थी मेहंदी।सुर्ख लाल रंग से रागिनी के हाथों की सुंदरता को और भी बढ़ा रही थी और हो भी क्यों नही?
आख़िर आज रागिनी के जीवन में उसके प्रेमी का प्रवेश जो होना था,यानि आज शादी थी रागिनी की उसके बचपन के प्यार कमलेश से।रागिनी और कमलेश दोनों का ही घर पास पास ही था,दोनों साथ ही खेलते, पढ़ते और घूमते।
कब बचपना खत्म हुआ और वो जवान हुए उन्हें पता ही नही चला और उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई।
रागिनी को बचपन से ही मेहंदी बहोत पसंद थी,वो अक्सर कमलेश से मेहंदी के पत्ते तोड़ने को कहती और कमलेश इस शर्त पे पत्ते लाता की वो मेहंदी लगाएगी तो हाथों में उसका नाम जरूर होगा।
फिर कमलेश देश की सेवा के लिये फौज में भर्ती हो गया,और देश की सेवा करने लगा।
इसबार जब वो घर आया तो उसके परिवार वालो ने रागिनी के घर वालों से बात करके उन दोनों की शादी पक्की कर दी,निश्चित तिथि पर उनका विवाह होना था।
आज रागिनी और कमलेश की शादी हैं, बारात आई और रागिनी की शादी कमलेश से हो गई,दोनों ही बहोत खुश थे।
सभी रस्मों के बाद जब दोनों मिले तो रागिनी ने कमलेश को अपनी मेहंदी दिखाई,सुर्ख लाल रंग में रची मेहंदी और उसमे लिखा कमलेश का नाम दोनों बहोत ही खुश थे तभी अचानक फोन की घण्टी बजी…..
कमलेश ने फोन पे बात की और कमरे में आया…और बोला ” रागिनी मुझे अभी तुरन्त जाना होगा,कर्नल साहेब का आदेश आया हैं मुझे देश की सेवा करनी है तो तुम मुझे विदाई दो”
रागिनी दुःखी हो गई उसके आँखों मे आँसू आ गये।
कमलेश बोला ” दुःखी न हो पगली मैं अभी जा रहा हूँ और ये वादा कर रहा हूँ,कि मेहंदी का रंग छूटने से पहले ही तुम्हारे पास आ जाऊँगा”
कमलेश चला गया,रागिनी रोज अपने हाथों की मेहंदी में कमलेश के नाम को देखती और उसकी बाट जोहती।
फिर दो दिन के बाद उसे खबर मिली कि दुश्मनों से लड़ते हुए उसका कमलेश शहीद हो गया।
दूसरे दिन कमलेश का शव आया,और रागिनी बस बेसुध हो अपने हाथों की मेहंदी को देख रही थी,जो अभी भी सुर्ख लाल थी,कमलेश ने अपना वादा पूरा किया,वो आया मगर शव के रूप में और रागिनी के हाथों में लगी मेहंदी का रंग भी फ़ीका ना हुआ था।#राji✍✍✍
