उमड़ा हुआ तूफान है खतरे में हिंदुस्तान है
अपनी जमीन अपना गगन यह खतरों से अंजान है।पग- पग धरा भी दुश्मनों से हो रहा आघात अब
जालिम जमाना देखती कोई नहीं बलवान है।एक नाम की खातिर झुका है शीश अपने देश में,
कोई कहे अल्लाह तो कोई कहे भगवान है।पग चूम कर आगे बढ़ें, वह वीर हैं फौलाद के,
वो कर्ज माटी का चुकाते, हो जाते कुर्बान हैं।जीवन सफल हो जाएगा बलिदानों पर यह सर कटे,
इस देश की एकता हमारी तो नई पहचान है।नीरा ठाकुर “नीलू”
बानबरद, दुर्ग, छत्तीसगढ़
