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होली के रंग - बदरंग- नन्दलाल मणि त्रिपाठी

——-होली के रंग बदरंग—–

मोहल्ले वाले होली का त्यौहार मानाने के लिये होली होली मिलन
मोहल्ला समिति हर वर्ष होली के
आने का इंतज़ार करते रहते पुरे वर्ष चाहे आपस में अपने मतभेदों और स्वार्थ में भले ही लड़ते झगड़ते हो मगर होली में सब गीले शिकवे भूल कर एक दूसरे के गले मिलते और कसमे खाते की हम मोहल्ले वाले अब कभी क्षुद्र स्वार्थ में आपस में कभी रार
नहीं करेंगे होली की खुमारी उतारते ही सभी मोहल्ले वाले अपने पूर्ववर्ती आचरण को अंगीकार कर लेते।इसी तरह हर वर्ष होली आती और चली जाती होली का फिर इंतज़ार शुरू हो जाता।मोहल्ले के नवयुवक नौयुवतिया मोहल्ले की किसी भी
परम्परा से अनजान अपने समय उमंग और उल्लास से आपस में मिलते खेलते झगड़ते फिर मिलते
मिल्ली कट्टी करते।मोहल्ले के किसी भी माँ बाप को अपनी संतानो को इस बात को लेकर कोई शिकायत नहीं थी की उनका बेटा या बेटी किसके बेटा बेटी से घुला मिला है।महल्ले में अमन का सामान्यतः माहौल बना रहता।दिन महीने साल बीतते गए एक दिन फिर होली का त्यौहार आया
मोहल्ले के लोग सदा की भाँती अपने गीले शिकवे भुला कर एक दूसरे के घर टोली बनाकर होली
खेलते होली के उन्मुक्त उत्सव के
आनंद में अतिरेक मस्त थे।मोहल्ले के बच्चे भी अपनी टोली बनाकर होली की मस्ती के रंग में सारबोर थे मोहल्ले के बच्चे होली खेलते खेलते अपने मोहल्ले से पड़ोस के मोहल्ले के अपने दोस्तों
को साथ कर लिया फिर दूसरे मोहल्ले इस प्रकार होली की बच्चों की बड़ी टोली जिसमे बीस पच्चीस बच्चे सम्मिलित थे मोहल्ले से नगर के गली चौराहों पर होली की मस्ती के आलम में मसगुल थे।दिन के लगभग एक बज चुके थे की बच्चों को जोश और होश होली के रंग में सारबोर
था और समाप्त होने या कम होने
का नाम नहीं ले रहा था।बच्चे नगर के मुख्य चौराहे से अपनी होली की खुमारी में गुजर रहे थे की चौराहे पर तैनात दरोगा जी पर बच्चों की नज़र पड़ गयी जिनकी वर्दी एकदम साफ़ सुथरी
और जिस पर होली के रंग का एक धब्बा नहीं था बच्चों ने दारोगा जी से रंग दलवाने की पुरजोर अपील की दरोगा जी ने वर्दी के धौंस में धमकी दे डाली की वर्दी पर यदि किसी ने भी रंग
डाला तो उसे गोली मार देंगे ।
बच्चों को लगा की कही सही दरोगा जी गोली ना मार दे बच्चों की टोली आगे बढ़ गयी मगर टोली के एक बच्चे ने दरोगा जी की वर्दी पर होली के रंग डाल दिया दरोगा जी के गुस्से का पारा सातवे आसमान पर् चढ़ गया उन्होंने आव ना देखा ताव अपनी
सर्विस रिवाल्वर से पूरी छः की छः गोलियां बच्चों की होली की टोली
पर दाग दी होली के रंग में सारबोर मस्ती की हद हस्ती छः बच्चों ने खून से लथपथ सड़क पर दम तोड़ दिया पुरे नगर के हर
मोहल्ले में होली का रंग मातम में
बदल गया होली का रंग बदरंग हो
गया चारो तरफ कोहराम मच गया उन छ परिवारों के लिए जिनके बच्चे दारोग़ा के सनकी पन से मारे गए थे उनके परिवार में होली का त्यौहार अभीशाप बन गया हमेशा के लिये होली का त्यौहार बदनुमा दाग बदरंग हो गया।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

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