हिन्दी भाषा।
हिन्दी मात्र एक भाषा ही नहीं, यह एक जीवन धारा है, जो प्रत्येक भारतीय के हृदय में प्रवाहित हो रही है। हृदय की गहराइयों से निकलकर वाणी रूप में सभी देशवासियों को एक सूत्र में बांधने में सक्षम हो रही है। साहित्य के रूप में हिन्दी दशवीं शताब्दी में वीरगाथा काल या आदि काल से लेकर आधुनिक काल तक की यात्रा में अनेक सोपानों को पार कर इस रूप में हमारे मन को जोड़ रही है। वैदिक संस्कृत से अपभ्रंशों यथा अनेक लिपियों के साहित्य को अपना बनाती हुई, अनेक बोलियों, रचना विधानों को संग्रहीत करने वाली यह हिन्दी विश्व भाषा बनने की राह पर है।
यह अत्यंत सरल तथा बोधगम्य होने के कारण सीखने में आसान है। वर्णमाला वैज्ञानिक तथा स्वर विज्ञान पर पूर्णतः खरी उतरने के कारण सर्व ग्राह्य है। आज दुनिया के पटल पर हिन्दी का अति सम्मान है। विश्व मंचों पर हिन्दी बोली तथा सुनी जाती है। विश्व के अनेक देशों में हिन्दी का उच्च स्तर पर पठन पाठन होता है। विश्व के १६७ विश्व विद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है। हिन्दी सिनेमा तथा सोशल मीडिया में हिन्दी के बढ़ते प्रभाव के कारण हिन्दी का उत्तरोत्तर विकास तथा प्रसार हो रहा है। आज विश्व का हर पाँचवाँ व्यक्ति हिन्दी जानता है। मंदारिन तथा अंग्रेजी के बाद हिन्दी तीसरी भाषा बन गई है।
भारत में हिन्दी भाषा एक राजभाषा के रूप में सतत अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही है। हर क्षेत्र में हिन्दी का प्रवेश हो गया है। व्यापार, शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, पत्रकारिता आर्थिक क्षेत्र हर जगह अपना ध्वज फहरा रही है। हमें भी हिन्दी का अधिक से अधिक प्रयोग करते हुए इसके प्रचार प्रसार में अपना योगदान देते रहना चाहिए।
फूल चंद्र विश्वकर्मा