हिन्दी भाषा को और लोकप्रिय कैसे बनाएं व जन-जन तक कैसे पहुँचायें।
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हिन्दी भाषा को वर्ष 1949 में राज- भाषा का स्थान दिया गया किन्तु हिन्दी आज भी राष्ट्र- भाषा नहीं है यह अतीव दुखद है।गांधी जी ने 25 मार्च 1918 को इंदौर अधिवेशन में हिन्दी को राष्ट्र-भाषा घोषित करने पर बल दिया था। विश्व में लगभग 6 सौ मिलियन लोग हिन्दी बोलते हैं।वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार सन 2050 तक हिन्दी विश्व में अधिपत्य स्थापित कर लेगी।
किन्तु हिन्दी का शैने: शैने: ह्वास हुआ है ।हमें हिन्दी को पल्लवित -पुष्पित कर लोकप्रिय बनाना है इसके लिये स्नातक स्तर तक हिन्दी की अनिवार्यता नितांत आवाश्यक है। सरकारी व निजी कार्यालयों में काम-काज, पत्राचार आदि हिन्दी में ही सम्पादित किए जायें।कोर्ट में मुकदमें सम्बंधित कार्य में हिन्दी की अनिवार्यता हो। शिक्षकों को हिन्दी प्रोत्साहन के लिये प्रेरित किया जाये।पूर्व हिन्दी विद्वानों की स्मृति में कार्यक्रमों का आयोजन हो व हिन्दी लेखकों को सम्मानित/प्रोत्साहित किया जाये।हिन्दी भाषा की प्रचुर मात्रा में पुस्तकालय खोलें जायें जहां मुफ्त हिन्दी पुस्तकों को पढ़ने की सुविधा हो। सरकारी स्कूलों की कार्य-शैली व दशा में मूल -भूत सुधार हो।राजनीति से जुड़े लोग हिन्दी की अनिवार्यता के महत्व को समझें व इसे लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निर्वाह करें।अंग्रेजी स्कूलों के अनियंत्रित प्रवाह को रोका जाये।
नौकरी के लिये साक्षात्कार हिन्दी भाषा में सम्पादित किए जायें।हिन्दी- माध्यम स्कूलों को सरकार अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराये। प्रत्येक माह का अन्तिम दिन हिन्दी सप्ताह के रूप में मनाया जाये।हिन्दी की अनिवार्यता को सरकार दृढ़ता से लागू करे यह मात्र औपचारिकता न हो।
स्कूल/कालेजों में हिन्दी प्रतियोगिताएं आयोजित की जायें व छात्रों को पुरुस्कार द्वारा हिन्दी के प्रति रुचि का संवर्धन किया जाये।हिन्दी सेमिनार आयोजित किए जायें।लेखक/ कवि- गण हिन्दी में लेख/कविताएँ लिखें व उन्हें प्रकाशित किया जाये।समाचार- पत्र, दूरदर्शन हिन्दी के प्रचार- प्रसार में महती भूमिका निर्वाह करें
फिल्म -उद्योग हिन्दी भाषा के उत्कृष्ट चल- चित्र समाज में प्रस्तुत करे।
जहां तक हिन्दी भाषा को जन- जन पहुँचाने का प्रश्न है हिन्दी प्रोत्साहन के लिये नुक्कड़ नाटकों का सहारा लिया जाये।दक्षिण भारत में मोबाइल वैन के माध्यम से गाँव- गाँव में हिन्दी- महत्व को बताया जाये व मुफ्त पुस्तकें वितरित की जायें , हिन्दी माध्यम स्कूलों में मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाये।
सरकार हिन्दी को जन- जन तक पहुँचानें के लिये अतिरिक्त धन- राशि उपलब्ध कराये।स्वयं सेवी संस्थाएं प्रमुख भूमिका निभाएँ। दूरस्थ गाँव में हिन्दी पुस्तकें मुफ्त उपलब्ध की जायें।सरकार जीर्ण- शीर्ण हिन्दी योजनाओं को त्याग कर आकर्षक उत्कृष्ट नव योजनाये बनाये।
प्रत्येक जिले में हिन्दी विद्वानों की एक समिति गठित की जाये जो हिन्दी को जन – जन पहुँचाने में उत्कृष्ट योजनायें बनाकर उन्हें दृढता पूर्वक कार्यान्वित करे।तभी हम हिन्दी की गरिमा पुन: प्राप्त कर सकते हैं व हिन्दी को लोकप्रिय बनाने के साथ- साथ इसे जन- जन तक पहुँचा कर हिन्दी दीपों को पुन: प्रज्जवलित कर सकते हैं।
एस पी दीक्षित
उन्नाव, उत्तर प्रदेश