मुंशी प्रेमचंद जी पर आलेख।
विधा-गद्य।
मुशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के महान साहित्यकारों में शुमार हैं।
पंचतंत्र को उन्होंने ह्रास होते मानवीय मूल्यों के उत्थान के लिए एक ग्रंथ के रुप में हमारे सम्मुख प्रस्तुत किया है।
अपनी एक लोकप्रिय प्राचीन कहानी ‘दो बैलों की कथा’ में प्रेमचंद कहते हैं कि, जानवरों में गधे को सबसे अधिक मूर्ख माना जाता है, क्योंकि वह कभी भी आवेशित नहीं होता है,और किसी भी परिस्थिति में अपने चेहरे पर भाव प्रकट नहीं करता है।
प्रेमचंद जी ने इसे उसके ऋषिवत् स्वभाव की संज्ञा दी है, प्रेमचंद जी का मानना है कि समाज में इस प्रकार के लोग बहुतायत संख्या में हैं, जो कई प्रकार की यंत्रणाएं और प्रताड़नाएं सहकर भी उफ तक नहीं करते हैं।
अब ऐसे लोगों के स्वभाव को भी क्या ऋषिवत् स्वभाव की संज्ञा दी जाए?
एक प्रचलित लोक मान्यता के अनुसार प्रेमचंद जी कहते हैं कि, गधे के बाद मूर्खता में दूसरा स्थान बैल का है, लेकिन प्रेमचंद जी इस मान्यता का समर्थन नहीं करते । वे कहते हैं कि बैल का स्वभाव गधे से भिन्न होता है। वो कभी कभार मारने के लिए उद्यत होकर विरोध प्रकट कर ही लेता है।
इसका प्रमाण प्रेमचंद जी झूरी के दो बैलों हीरा और मोती का उदाहरण देकर प्रस्तुत करते हैं।
दोनों में गहरी मित्रता के साथ-साथ मालिक के प्रति वफादारी एवं बुराइयों के खिलाफ संघर्ष करने जैसे विलक्षण
गुण थे।
वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में मुंशी प्रेमचंद अपनी कहानी के दो प्रमुख किरदार हीरा और मोती से हमें यही संदेश देना चाहते हैं कि, हमें बुराइयों के विरुद्ध आवाज उठा कर अपने होने का एहसास कराना चाहिए। जिससे असामाजिक एवं विकृत मानसिकता से ग्रसित लोगों का मनोबल न बढने पाए।
आलेख
बेलीराम कंसवाल
घनसाली,
टिहरी गढ़वाल,उतराखण्ड।