ग़ज़ल
सच कहता हूँ यार बहुत है ।
इन आँखों में प्यार बहुत है ।
आँखे दरिया ,जुल्फें सागर,
चेहरे पर मेयार बहुत है।
नाज़ुक होठों से सरगोशी ,
झरने को तैयार बहुत है ।
खुशियों में है साथ ज़माना,
रूठो तो मनुहार बहुत है ।
मीठा- मीठा प्यार तुम्हारा ,
दिल तक पहुँचे यार बहुत है ।
हाले दिल किसको समझायें ,
सिंगल दिल दिलदार बहुत है ।
रकमिश आओ प्रेम सँजोये ,
इतना ही क़िरदार बहुत है ।
-रकमिश सुल्तानपुरी