1. आया पतझर
आया पतझर पात झरे
गौरैया
बतियाती-गाती
गिलहरियाँ
हरी
फलियों खाती
पल्लव
खड़क
रहे।
डाल-
डाल पर
व्याप्त उदासी
तिनका-
तिनका
रग-रग प्यासी
आँखें
आस
।भरे
2. खग-कुल पंचामृत घोलें
अस्ताचल
रवि के
अरुण
स्कंध पर,
प्रचल
करते
सर्व
जुगलबन्द
खग-कुल रव पंचामृत घोले।
धवल
शिखर के
पार
पदार्पण
संध्या-
सखी को
वाणी
समर्पण
गाछ- गाछ पर कोकिल बोले।
घटाटोप,
घनघोर
अँधेरा
बीच राह
यामा ने
घेरा
उड़ते क्लांत बगुलों के टोलें।
3. राजनीति पर गीत
राजनीति- राहें रपटीली
चकाचौंध चाहें भड़कीली
चलने वाला,
बस!
गिरता है।
आम सभा से संसद तक
नेता करते लक-लक-लक
बहक गया जो,
बस!
मरता है।
गहरे वादें उथले काम
कहते एक देते छदाम
हर नेता,
बस!
घर भरता है।
~दिनेश सूत्रधार