कुछ संस्मरण जो हिस्सा बन गये हैं जीवन के। माँ बचपन में बहुत सी कथाएँ सुनाया करती थी। मुझे प्रायः सभी कथाएँ लगभग स्मरण हैं उनमें से एक हास्य कथा आप सबों को सुनाती हूँ।
बात राजस्थान के किसी छोटे से कस्बे की है। स्त्रियाँ वैसे तो स्वभाव से सरल हुआ करती हैं पर कभी कभी पुरुष को बहुत पीछे छोड़ जाती हैं।
एक पति पत्नी थे कस्बे में। पत्नी बड़ी आलसी और कामचोर थी। पति इस बात से बड़ा परेशान रहता था। एक दिन उसने पत्नी को कुछ रुई लाकर दी और कहा –
इसका सूत कात दो। साहूकार से लेकर आया हूँ। अगर तुम इसका सूता बना दो तो मैं साहूकार को दे आऊँ ताकि हमारे पास जीविका के लिए कुछ पैसे आ जाएँ। पत्नी ने कहा- ठीक है।
पूरी रात सोचती रही कि मुझे ऐसा क्या करना चाहिए जिससे मुझे सूत कातने से छूटकारा मिल जाये? उसे एक उपाय सूझा। दूसरे दिन उसने रात का एक plan बनाया। रात हुई तो पति खेत में सोने चला गया और उसने ऊँट पर बैठकर चेहरे को ढाँप लिया और खेत में सोये पति के चारों ओर चक्कर लगाते हुए ज़ोर ज़ोर से आवाज़ लगाने लगी “गिड़गिड़गिन्दा कहाँ गया, खेत रखवाला क्या करूँ, घर धरियाणी क्या करूँ, सूत की पूणी” ? पति बेचारा डर से कांपने लगा, सोचने
लगा ये तो कोई चुड़ैल है या कोई आय बलाय?मन ही मन कहने लगा हे भगवान घर की धरियाणी को तो कुछ ना करना भले ही सूत की पूणी ना हो। घरवाली को कुछ हो गया तो मैं रोटी के दो रूखे सूखे टुकड़ों से भी चला जाऊंगा।
सुबह खेत से बेचारा घर आया और पत्नी को रात का सारा वृतान्त सुनाया। पत्नी मन ही मन खुश हो रही थी कि उसका पैंतरा काम आगया। पति ने कहा-
ला वो रुई मुझे दे, साहूकार को वापस कर के आता हूँ। अंधा क्या मांगे दो आँख, उसने झट से रुई पति को लाकर दी और कहा – जा इसे लौटा कर आ। मुझे कुछ हो गया तो तुम्हारा क्या होगा? “तिरिया चरित्रम, पुरुषस्य भाग्यम” जाने ना कोई, जाने ना कोई। स्त्री का चरित्र और पुरुष का भाग्य कोई आज तक जान नहीं पाया। फिर शातिर स्त्री की बात तो मत पूछो। कैसे कैसे पैंतरों से पुरुष को आजमाती है।
सारभूत सत्य यह है इस कहानी का कि कोई कितना ही जतन कर ले पर स्त्री के चरित्र से पार नहीं पा सकता।उस आलसी और कामचोर स्त्री ने ठान लिया कि मुझे सूता कातना नहीं है तो नहीं है, बस।
बेचारा पति रुई वापस दे आया साहूकार को। मरता क्या ना करता? उसे अपनी पत्नी की फ़िकर थी पर इस बात से अनिभिज्ञ था कि उसकी पत्नी ने क्या षड्यंत्र रचा उसके साथ?
मैं अपनी माँ को कोटि कोटि नमन करती हूँ 🙏🙏 कि उन्होंने जो ज्ञान हमें बचपन में दिया वो आजतक मेरी धरोहर है, मेरी पूँजी है। ऐसी विदुषी माँ की कोख से मैं बार बार जन्म लेना चाहूँगी। Love you maa ❤❤🌹🌹❤❤🌹🌹
रचना शर्मा
