मोक्ष की प्राप्ति
मनप्रीत सिंह संधू
लवली प्रोफैशनल यूनिवर्सिटी पंजाब
मोक्ष का अर्थ होता है मुक्तिI लेकिन अधिकतर लोग यह समझते है कि मोक्ष का अर्थ जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति हैI कुछ लोगों का यह मानना है कि अच्छे कर्म करने से मोक्ष की प्राप्ति होती हैI कुछ कहते है कि मोक्ष के बाद व्यक्ति शून्य हो जाता है, अंधकार में लीन हो जाता है या संसार से अलग हो जाता हैI मोक्ष एक ऐसी दशा है जिसे मनोदशा नहीं कह सकतेI इस दशा में न मृत्यु का भय होता है न संसार की चिंताI सिर्फ परम आनंद, परम होश, परम शक्तिशाली होने का अनुभवI इसी में परम शक्तिशाली होने का बोध छुपा है, जहाँ न भूख है न प्यास, न सुख न दुःख, न अन्धकार न प्रकाश, न जन्म है न मरण और न किसी का प्रभावI हर तरह के बंधन से मुक्ति ही मोक्ष है केवल जन्म और मरण से मुक्ति ही मोक्ष नहीं हैI ध्यान को छोडकर अभी तक कोई ऐसा मार्ग नहीं खोजा गया है जिससे समाधि या मोक्ष पाया जा सकेI लोग भक्ति की बात आवश्य करते है लेकिन भक्ति भी ध्यान का एक प्रकार हैI
मोक्ष शब्द की व्युत्पति मुच धातु से त्यागना अर्थ में हुई हैI इसी कारण, मोक्ष का अर्थ मृत्यु से लिया जाता हैI किन्तु दर्शन शास्त्र इससे नितांत पृथक परम शांति और आनंद की अवस्था को मोक्ष कहता हैI मोक्ष का अर्थ छुटकारा पाना होता हैI अध्यासजन्य मिथ्याबंधन से छुटकारा पाने का नाम मुक्ति हैI मोक्ष का अर्थ जन्म और मरण के चक्र से मुक्ति के अतिरिक्त सर्वशक्तिमान बन जाना हैI प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार की मुक्ति चाहता है, बंधनों से मुक्ति या दुखों से मुक्ति, जेल से मुक्ति या दवाखाने से मुक्ति, परेशानी से मुक्ति या दिमागी उलझनों से मुक्तिI मनुष्य होने का मतलब यह है कि हम लोग पशु या पक्षी की योनी से मुक्त हैI
भक्ति : भक्ति भी मुक्ति का एक मार्ग हैI भक्ति भी कई प्रकार की होती हैI इसमें श्रवण, भजन-कीर्तन, नाम जप स्मरण, मंत्र जप, पाद सेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य, पूजा-आरती, प्रार्थना आदि शामिल हैI इस तरह यह भी मानव मुक्ति के लिए ही करता है भक्ति मुक्ति का एक मार्ग हैI
योग : योग अर्थात मोक्ष के मार्ग की सीढ़ियाँ, पहली यम, दूसरी नियम, तीसरी आसन मुद्रा, चौथी प्राणयाम क्रिया, पांचवी प्रत्याहार, छठी धारणा, सातवीं ध्यान, आठवीं और अंतिम समाधि अर्थात मोक्षI
ध्यान : ध्यान का अर्थ शरीर और मन तन्द्रा को छोडकर होश्पूर्ण हो जानाI ध्यान कई प्रकार से किया जाता हैI इसका उद्देश्य साखीभाव में स्थित होकर मोक्ष को प्राप्त करना होता हैI ध्यान जैसे-जैसे गहराता है, व्यक्ति वैसे ही साखीभाव में स्थित होने लगता हैI
तंत्र : मोक्ष प्राप्ति का तांत्रिक मार्ग भी हैI इसका अर्थ है कि किसी वस्तु को बलपूर्वक हासिल करनाI तंत्र भोग से मोक्ष की ओर गमन हैI इस मार्ग में कई तरह की साधनाओं का उल्लेख मिलता हैI तंत्र मार्ग को वाममार्ग भी कहते हैंI इसको गलत अर्थों में नहीं लेना चाहिएI
ज्ञान : साक्षीभाव द्वारा विशुद्ध आत्मा का ज्ञान प्राप्त करना ही ज्ञान मार्ग हैI ईश्वर, जीवन, ब्रह्मांड, आत्मा, जन्म और मरण आदि के प्रश्नों से उपजे मानसिक द्वंद्व को एक तरफ रखकर निर्विचार को ही महत्व देंगे, तो साक्षीभाव उत्पन्न होगाI वेद, उपनिषद और गीता के श्लोकों का अर्थ समझे बिना यह संभव नहीं हैI
कर्म और आचरण : कर्मों में कुशलता लाना सहज योग हैI इनका पालन करके कोई भी मानव अपने जीवन में सुख और जीवन के बाद मोक्ष प्राप्त कर सकता हैI
सत्य, सच्चाई और मोक्ष
जीवन में सत्य का बहुत महत्व हैI हम उन्हीं व्यक्तियों को पसंद करते है जो सदैव सत्य बोलते हैंI झूठे और मक्कार लोगों को कोई पसंद नहीं करताI हमारे देश का कानून भी सत्य पर ही अपना फैसला देता है, जब किसी बात पर विवाद होता हो अदालत में जज भी यही पूछता है की सत्य क्या है, इसलिए सत्य का हमारे जीवन में बहुत महत्व हैI शास्त्रों में कहा गया है कि सत्य का मार्ग धर्म का मार्ग होता हैI महाभारत के युद्ध में पांडवों की जीत इसलिए हुई थी क्योंकि वह सत्य का मार्ग अपना रहे थेI सत्य का मार्ग धर्म का मार्ग कहा जाता है, इसे अपना कर जीत प्राप्त की जा सकती हैI सत्य हमेंशा कड़वा होता है, कुछ लोग तो सत्य देखना ही नहीं चाहते वह तो बस अँधेरे में जीना चाहते हैI वर्तमान में ऐसा ही होता है किसी को सत्य नहीं देखना हैI एक पिता या भाई को अपनी बहन की शादी अच्छे घर में करनी होती है जिसके लिए उसे दहेज देना होता है यह सत्य है, लड़के वाले खुशी-खुशी दहेज प्राप्त कर लेते हैंI लेकिन जब उनको अपने लड़की की शादी करनी होती है तो वह दहेज़ की निंदा करते हैं यह भी सच हैI सभी को अपना स्वार्थ देखना है किसी को सत्य से मतलब नहीं है इसी कारण हम वर्तमान में बहुत सी समस्याओं में घिरे हुए हैंI इन समस्याओं से छुटकारा पाया जा सके तांकि आने वाले समय में हम इन समस्याओं से बच सकेI हमें केवल स्वार्थ को लेकर नहीं चलना होगा सत्य और सच्चाई का मार्ग अपनाना होगा इसी से मोक्ष की प्राप्ति भी होती हैI
बहुत बार व्यक्ति इतना भ्रमित हो जाता है की सत्य की पहचान तक नहीं कर पाताI जब उसे असफलता और भटकाव महसूस होता है तब वह सत्य की पहचान कर पाता हैI जो लोग ईमानदार है वह सदैव सत्य बोलते हैंI जो लोग झूठे, बेईमान और मक्कार होते है वह हमें ऐसे मक्कार और झूठे लोगो से बचना है जो अपने स्वार्थ के लिए असत्य बोलते हैंI सत्य का साथ देना बहुत कठिन है व्यक्ति अनेक बन्धनों में बंधा होता हैI वीर पुरुष लोग ही सत्य के मार्ग पर चल पाते हैंI यह मार्ग इतना कठिन है की हर किसी के बस की बात नहीं है इस मार्ग पर चल पानाI लेकिन हमें ज्यादा से ज्यादा कोशिश सत्य पर चलने की करनी चाहिए तभी हम मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैंI सत्य के मार्ग पर चलकर व्यक्ति को आत्म संतुष्टि मिलती है और मोक्ष और यश प्राप्त होता हैI