युवा पीढ़ी में मानसिक तनाव
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युवावस्था एक ऐसी अवस्था होती है जो बाल्यावस्था व वृद्धावस्था की मध्य कड़ी कही जाती है। इसे जीवन का सबसे बेहतर अवस्था भी कहा जाता है।इसे तनाव और तूफान की अवस्था भी कहा जाता है। यह वही समय होता है जब व्यक्ति अपने भविष्य को संवारने हेतु प्रयासरत पाया जाता है। इस अवस्था में कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। व्यक्ति की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। आजीविका की टोह में प्रतिस्पर्धा के बढ़ने से कई प्रकार के मानसिक दबाव से तनाव जैसी स्थिति का उत्पन्न होना आज आम बात हो गया है।
युवा वर्ग में तनाव के प्रमुख कारण हो सकते हैं-
1-बेरोजगारी। 2-रोग
3-पारिवारिक समस्या। 4-अकेलापन
बेरोजगारी–
आज युवा वर्ग मेहनत करके नौकरी की तलाश में अनेक प्रतिस्पर्धाओं
में भाग लेकर जीवन को सफल बनाना चाह रहे है। परन्तु बेरोजगारी इस कदर बढ़ गई है कि एक पद पर हजारों की भीड़ दिख जाती है। बार-बार प्रतिस्पर्धा में असफल होने से युवा तनाव ग्रसित हो जाता है।
रोग–
आज खान-पान की स्थिति में काफी गिरावट महसूस की जा रही है। फसलों में ज्यादा उर्वरक से फसल की पौष्टिकता कम होती जा रही है। जिससे मानसिक बीमारी, उदर रोग आदि बीमारी का उद्भव हो गया है। जो तनाव का प्रमुख कारक है।

पारिवारिक समस्या–
कुछ लोगो के घरों में अशांति, गरीबी, कलह आदि के होने से भी युवाओं में मानसिक ह्रास देखने को मिलते हैं।
अकेलापन-
युवा अवस्था भटकाव की अवस्था है। यह वह अवस्था है जो विषम लिंगी के प्रति झुकाव रहता है। प्रेम में धोखा खाने से अकेलापन होना स्वाभाविक है। जब व्यक्ति अकेला होगा तो निश्चित रूप से तनाव ग्रसित होगा। अवसाद की स्थिति में वह आत्महत्या भी कर लेता है।
लोगों में बढ़ते तनाव से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जाहिर की है। आज लगभग 50 प्रतिशत जनसंख्या मानसिक अवसाद से ग्रसित है। यानि 5 महिलाओं में 1 महिला तथा 12 पुरुषों में 1 पुरुष मानसिक बीमारी से ग्रस्त है।
निष्कर्षतः हम कह सकते है कि अभिभावक अपने बच्चे को परिस्थितियों के अनुकूल ढालने हेतु तैयार करता रहे।
स्वरचित मौलिक आलेख।
✍️सरेश सौरभ ग़ाज़ीपुरी
रामपुर फुफुआव, ज़मानियाँ,
ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश।
मोबाइल-7905774102