चार दिन की जिन्दगानी
*********************चार दिन की हो जिन्दगानी
मस्ती से भरपूर हो जवानीअगर कोई भी न हो दीवाना
कैसै उल्फत में होगी दीवानीघाव तलवार का है भर जाए
चोट पहुंचती है बहुत जुबानीहमसफ र न हो रहगुजर में
बहाव में कैसे बहेगी रवानीसदैव सच्चाई से निभते रहें
रिश्ते नातो मेंत्रन हो बेईमानीमनमर्जियों से हों मुक्म्मल हों
कहीं कोई होती न हो शैतानीझूठे फ़रेबों में नहीं धंस जाए
जिन्दगी मौसम सी सुहानीमनसीरत जीने का है शौकीन
जीवन की शामें हों सुहानी
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)
