बस इतना ही कहना है
इंसान को इंसान की नजर से तोलिए,
दो शब्द ही सही, मगर प्यार से बोलिए,
बस इतना ही कहना है.
ज्ञान की किरणों को बिखराते चलिए,
दुख हटा सुख-सुमन छितराते चलिए,
बस इतना ही कहना है.
गगन की लालिमा से प्यार सीखते चलिए,
घटा की कालिमा को उपकार समझते चलिए,
बस इतना ही कहना है.
स्नेह-सरोवर में स्नान करते चलिए,
प्रभु की दयामय कृपा का ध्यान धरते चलिए,
बस इतना ही कहना है.
निज देश का मान बढ़ाते चलिए,
निज भाषा की गुड्डी ऊंची चढ़ाते चलिए,
बस इतना ही कहना है.
ज़िंदगी को ख़ास समझते चलिए,
आत्मविश्वास की महक से महकते चलिए,
बस इतना ही कहना है.
भीड़-भड़क्के से किनारा करते चलिए,
अपनी राह खुद रोशन करते चलिए,
बस इतना ही कहना है.
लीला तिवानी
नई दिल्ली