समंदर के पास लहरो का कोई हिसाब नही होता
दुनिया वालो हर “क्यो” का कोई जवाब नहीं होताहोठो पे मुस्कान सजा कर वो पूछते है “क्यो”
कोई बताये उनको इश्क पे हिजाब नही होताकई राज दफन रहते है यहां खुश्क आंखों में
हर रात की किस्मत में तो चाँद नही होताबहुत मशहूर है हम बेशक जीत भी जाए पर
अफसोस दिल की बस्ती में चुनाव नही होतायाद में उसकी सात छेद किये कान्हा ने बांस में
राधा तो कर लेती है पर मोहन से इंतजार नही होताआशीष वैष्णव
