मातृभाषा हिंदी (आलेख)
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हिन्दी एक परिष्कृत, व्याकरणनिष्ठ, वैज्ञानिक, भाव-विनिमय एवं संगठित करने वाली सरलतम भाषाओं में से एक है! जो उन्नति की आधारशिला है! हिन्दी के बिना भारतीयों के दिलों तक नही पहुंचा जा सकता! हिन्दी भाषा का उत्थान तभी हो सकता है जब सभी भारतीय कला, संस्कृति, सभ्यता, राजनीति एवं राष्ट्रीय एकता को हिन्दी के माध्यम से समझें! बच्चों को सभ्यता संस्कृति के प्रवाह में ढालने के लिए उन्हें सुसंस्कारित बनाने के लिए विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं!
अंग्रेजी, जर्मनी, फ्रेंच, स्पेनिश जैसी भाषाओं के बढ़ते प्रचलन से हिन्दी की महत्ता कम नही हो जाती! जिस प्रकार पिज्जा, बर्गर, नूडल्स जैसे खाद्य पदार्थों ने नई पीढ़ी के साथ-2 हर वर्ग को अपनी ओर आकर्षित किया है इसके बाबजूद घर की दाल, रोटी सुपाच्य, पौष्टिक आहार के रूप में सदैव से प्रतिष्ठित रही है और हमेशा रहेगी!
हिन्दुस्तान में हिन्दी के उत्थान की दृष्टि से तथा बच्चों का समुचित मानसिक विकास हिन्दी से ही सम्भव है इस के मद्देनज़र नयी शिक्षा नीति में हिन्दी को प्राथमिक स्तर तक अनिवार्य माना गया है! हिन्दी भाषा के विकास और उसका सम्मान में विद्यालयों, साहित्यकारों और सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है! प्रगति के किसी भी सोपान पर पहुँच ने बाद भी हर किसी को अपने माता- पिता, मातृभूमि और मातृभाषा के सम्मान के लिए हमेशा जागरूक रहना चाहिए! मातृभाषा की उन्नति के बिना व्यक्ति की उन्नति सम्भव नहीं है!
शब्द को अर्थवान बनाती है हिन्दी!
एकता की कुंजी है राष्ट्र भाषा हिन्दी!
सरिता “साहिल”