आयोजन – गद्य लेखन प्रतियोगिता ।
विषय – भारत वर्ष के लिए हिंदी भाषा ही सर्वसाधारण की भाषा
होने के लिए उपयुक्त है ।
भाषा वह साधन है जिसके द्वारा हम अपने विचारों को व्यक्त कर करते हैं । एक दूसरे की संस्कृति को जान सकते हैं । एक दूसरे के गुणों को अपना सकते हैं अथवा अवगुणों का त्याग कर सकते हैं ।
सामान्य रूप में भाषा को वैचारिक आदान-प्रदान का माध्यम कहा जा सकता है। भाषा आंतरिक अभिव्यक्ति का सर्वाधिक विश्वसनीय माध्यम भी है । यही नहीं यह हमारे आंतरिक क्षमता के निर्माण, विकास, हमारी अस्मिता और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान का भी साधन है। भाषा के बिना मनुष्य सर्वथा अपूर्ण है । इसके अभाव में मनुष्य अपने इतिहास और अपनी परम्परा से भी विच्छिन्न हो सकता है।
भारत एक महान देश है । यहाँ कई जाति, धर्म और संप्रदाय के लोग रहते हैं । इन सभी के बीच आपसी सामंजस्य और तालमेल के लिए एक भाषा की जानकारी सभी को होनी चाहिए । भारत के प्रायः सभी क्षेत्रों में उनके अपने क्षेत्रीय भाषा हैं और वे बोल चाल में इसका ही प्रयोग करते हैं । इसमें कोई बुराई नहीं और न ही किसी भाषा का अपमान है । परन्तु जब हम राष्ट्रीय स्तर पर आते हैं तो भारत में सभी क्षेत्रीय भाषाओं से ऊपर एक सर्वमान्य भाषा की आवश्यकता दिखती है । सभी क्षेत्र के बीच आपसी संवाद और सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए भारत की एक सर्वमान्य भाषा नितांत आवश्यक है । हालांकि बहुत से लोग अंग्रेजी को इसके विकल्प के रूप में देखते हैं और प्रयोग में भी लाते हैं । परन्तु अंग्रेजी भारतीय भाषा नहीं है और न ही सर्वसाधारण के बीच तक इसकी पहुंच है । इसलिए यह अपने को भ्रमित करने की ही बात रह जाती है ।
जब हम भारत में बोले जाने वाली भारतीय भाषाओं को देखते हैं तो यह स्पष्ट होता है कि भारत में बोली जाने वाली अधिकतर क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं का क्षेत्र सीमित है, सिर्फ वे अपने क्षेत्र में ही बोले और समझे जाते हैं । इन भाषाओं को दूसरे क्षेत्र के लोग नहीं समझ पाते हैं । भारतीय भाषाओं में सिर्फ हिंदी ही एक मात्र भाषा है जो भारत के अधिकांश क्षेत्रों में बोली जाती है और वैसे क्षेत्र जहाँ उस क्षेत्र की भारतीय भाषा बोली जाती है, के निवासी भी हिंदी भाषा को समझते हैं । इस वास्तविकता के आधार पर यह सत्य है कि भारत वर्ष के लिए हिंदी भाषा ही सर्वसाधारण की भाषा होने के लिए उपयुक्त है ।
भारत की आधी से अधिक आवादी या तो हिंदी भाषा बोलती है या फिर हिंदी भाषा को समझने में सक्षम है । अतः भारत वर्ष के लिए हिंदी भाषा को सर्वसाधारण की भाषा बनाने और अपनाने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए । निर्विवाद रूप से भारत वर्ष के लिए हिंदी भाषा ही सर्वसाधारण की भाषा होने के लिए उपयुक्त है ।
———————–
मेरी यह रचना स्वरचित, मौलिक और अप्रकाशित रचना है । मैं इसके संपादन और प्रकाशन का अधिकार साहित्य वसुधा को देता हूँ ।
नाम – अखौरी जयन्त सिन्हा
पता – उत्तरी शिवपुरी, हजारीबाग, झारखण्ड, पीन कोड – 825301