हिंदी का महत्व
हिंदी भाषा न सिर्फ हमारे देश की पहचान है बल्कि हमारे जीवन मुल्यों,संस्कृति एवं संस्कारों की रक्षक और संवाहक है ।
हिंदी विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है जो हमारे पारस्परिक ज्ञान, प्राचीन सभ्यता और आधुनिक प्रगति के बीच एक सेतु भी है ।
महात्मा गाँधी ने कहा था ” राष्ट्रभाषा वही हो सकती है जो सरकारी कर्मचारियों के लिए सहज व सुगम हो । ” हिंदी हमारे देश में सबसे ज्यादा बोली जाती है ,एकता और अखंडता का प्रतीक है ।
आज हमारे देश में अंग्रेजी का बोलबाला है सिर्फ इसलिए कि चाहे सरकारी दफ्तर हो या प्राइवेट कंपनी सब जगह कामकाज अंग्रेजी में होता है और अंग्रेजी बोलना शान की बात समझी जाती है इसलिए अगर हमें अपनी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा को सम्मान देना है तो सर्वप्रथम शिक्षा व्यवस्था पूर्णत: हिंदी में करना होगा । हर देश अपनी भाषा अपनाकर विकास की सीढ़ी चढ़ रहा है, तो हम क्यों नहीं?
हमें अपने मानसिक स्तर को सुधारने की जरूरत है कि हम अपने राष्ट्रभाषा का सम्मान करें और शिक्षा की भाषा, दफ्तरों में कामकाज की भाषा हिंदी में होनी चाहिए ।
बहुत सारे साहित्यकार हमारे देश में ऐसे हुए हैं जिन्होंने हिंदी के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं और हिंदी को जन-जन तक पहुंचाया है जैसे :- भारतेंदु हरिश्चंद्र,प्रेमचंद, सुमित्रानंदन पंत निराला, दिनकर ,महादेवी वर्मा, कबीर, मीरा ,रसखान आदि ।
जब तक हम हिंदी को शिक्षा व्यवस्था में नहीं लाएंगे तब तक हिंदी दिवस मनाने का कोई फायदा नहीं । हिंदी दिवस पर गली-गली में मंच सज जाते हैं और हिंदी पर पूरे जोश और जुनून से व्याख्यान दिए जाते हैं लेकिन कभी देने वाले से पूछिए जब अपने बच्चे की पढ़ाई की बारी आती है तो अच्छे से अच्छे अंग्रेजी मीडियम का स्कूल ढूंढते हैं ।
अंत में अगर हम चाहते हैं हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा और मातृभाषा बने तो हर देश की तरह हमें भी अपने देश में हिंदी को सर्वोपरि स्थान देना होगा । मैकाले की शिक्षा व्यवस्था को हटा कर अपनी पुरानी शिक्षा पद्धति अपनानी होगी ।
” संस्कृति की पहचान है हिंदी,
हिंदुस्तान की शान है हिंदी ।”
ज्योति सिंह
जमशेदपुर ,झारखंड