
——स्वामी विवेकानंद—–
स्वामी विवेकानंद भारतीय जीवन दर्शन का एक ऐसा अवतार है जो जीवन मूल्यों की विवेचना व्यख्या को आत्म साथ कर याथार्त के सत्यार्थ का प्रकाश है। जो आस्था विश्वास को जीवन की गौरव शाली परम्परा का आधार तो स्वीकार करते ही है त्याग तपस्या संघर्ष के परीक्षित संक्षिप्त जीवन को नैतिकता का आधार का शंख नाद करते मानवीय मूल्यों परम्परा का दिग्दर्शन करते है।युवाओ में निहित ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र समाज के सार्थक निर्माण का आवाहन उनके जीवन मूल्यों को आकर्षित करता युवाओं को आकर्षित करता है ।आस्था विश्वास का परीक्षण स्वयं वे गुरु शिष्य की परम्परा को ईश्वरीय व्यख्या प्रदान करते हुये आस्था के अस्तित्व को परिभाषित करते है। स्वामी विवेकानंद जी धर्म समाज को संस्कृत संस्कार के धागे में पिरोकर सक्षम समाज का विश्व मार्ग दर्शन देते है ।जो आजके भौतिकता वादी युग मे प्रासंगिक और प्रामाणिक है साथ ही साथ व्यवहारिक भी है स्वामी जी ने सन 1893 में 11 सितम्बर को यही संदेश सम्पूर्ण विश्व को विश्व धर्म संसद के माध्यम से दिया और उसे अनुपालन हेतु स्वय का व्यवहारिक आचरण प्रस्तुत किया ।
स्वामी विवेकानंद जी गुरु रामकृष्ण परम हंस जी के शिष्य होने के गौरव अनुकरणीय प्रस्तुत कर रिश्तों संबंधों की पवित्रता और आस्था का जागरण कर सम्पूर्ण विश्व मे मर्यादित सम्बन्धो की प्रामाणिकता तो प्रदान की ही माँ काली की देव शक्ति का साक्षात्कार कर साकार ब्रह्म की सनातन अवधारणा को भी सिद्ध किया स्वामी जी एक क्रांति के व्यक्तित्व थे और युगों युगों तक रहेंगे स्वामी जी ने मानवता की शांति सबृद्धि को कायरता नही स्वीकार किया कर्म और धर्म मे स्वतंत्रता और मानव मूल्यों की
वास्तविक अवधारणा का मूल मंत्र स्वामी जी को युवा शक्ति की प्रेरक प्रेरणा स्थापित करता है।
विवेकानंद चैतन्य युग की चेतना की दिशा दृष्टी कोण है।
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश