
वैवाहिक जीवन के शानदार पचास वर्षों की यात्रा और जानदार भविष्य
के लिये आदरणीय जे एल पी राजू
एवं आदरणीया लक्ष्मी जी को समर्पित।।———
राजू प्रेम प्यार नेह स्नेह का सागर
लक्ष्मी सागर की गहराई आत्म भाव
आत्म भाव के मंथन का प्रेम प्यार नेह स्नेह परिणाम।।
लक्ष्मी का राजू जीवन में प्रादुर्भाव
जीवन पथ उद्देश्यों काजीवन साथी आदर्श अस्तित्व सतीत्व
समपर्ण का अविरल निष्छल अविराम।।
राजू अक्षय अक़्क्षुण मर्यादा नाम
लक्ष्मी कीआस्था आशा विश्वास का
पुरुष पराक्रम पुरुषार्थ लक्ष्मी नारी
देवी है तो राजू है इष्ट भगवान।।
जीवन की बगिया में राजू लक्ष्मी
का संयुक्त संयोग रवि, रघु कुल
चिराग नेह प्रेम स्नेह जीवन की
फुलवारी की खुश्बू खुशियों अरमान
प्रवाह।।
अभियन्ता साहित्य पुजारी भाषा
की परिभाषा ज्ञान राजू जन्मेजय
जीवेत जाग्रतं जीवन की सच्चाई
स्वाभिमान ।।
लक्ष्मी स्नातक गृहणी पति परमेश्वर
परिवार गृहस्थी तपोवन की साध्वी
साधक नारी गौरव की मर्म महिमा
मान।।
राजू कर्म धर्म का बोध लक्ष्मी राजू
परछाई का सत्य अर्थ राजू
लक्ष्मी मानव मूल्यों मानवता के धन्य
धरोहर समय साथ।।
सेवा रोजी रोजगार का भी
अलग अंदाज प्रेरक प्रेरणा
राजू श्रम शक्ति का सदुपयोग
नियोजक नियोजन का अहंकर।।
सामीजक सेवा अंगदान सर्व शिक्षा
अभियान सम्पादन पत्र ,पत्रिका जन जन सरोकार में मूल्यवान योग दान।।
लक्ष्मी राजू के कदम कदम पर
सुख दुख में हिम्मत हौसला आशा
अरमान जीवन साथी ।
जोड़ी पति पत्नी की यह सत्य सनातन का सत्यार्थ।।
श्रेया पौत्री मासूम राजू के घर आँगन
मन आँगन की हर्ष हसिता खुशियां
सिद्धान्त परम्परा का परिवार।।
राजू लक्ष्मी की संग साथ के बीत
गए वर्ष उनचास पचासवाँ वर्ष
शहनाई की गूंज गान का नव
उल्लास ।।
राजू और लक्ष्मी का जीवन
निष्कंटक निरोग रहे ना हो कोई
दुःख पीड़ा लक्ष्मी का अहिवात
गंगा जमुना सूरज चाँद सा अटल
रहे।।
निर्धनता निर्जनता ना आये कभी
खुशियों की खुशबू की फुलवारी
रवि ,रघु ,श्रेया की मुस्कान सदा
वसी रहे।।
दीर्घायु निरोगी काया ईश्वर का
आशीर्वाद राजू लक्ष्मी के जीवन
निर्मल निर्झर शाश्वत बनी रहे।।
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश