
सच्चा प्रेम
रोहन नाम का एक लड़का एक कालेज में पढ़ता है। जहां एक रोहिनी नाम की एक लड़की भी पढ़ती है। लड़की बहुत खूबसूरत है जिसे रोहन रोज आते जाते देखता है। रोहिनी रोज ये देखती थी कि ये लड़का उसे रोज आते जाते देखता रहता है रोहिनी को उसका नाम नहीं पता था इसलिए वह कालेज से उसका नाम पता कर लेती है। और सब कुछ अनदेखा कर देती है मगर उस लड़की को देखते देखते रोहन को रोहिनी से प्यार हो जाता है। लड़की बहुत तेज और गुस्से वाली है जिससे रोहन डरता भी बहुत है। रोहन ने डरते डरते रोहिनी से एक दिन बात करने की हिम्मत जुटाई और मन ही मन सोचा आज रोहिनी से प्यार का इजहार कर के ही वापस आऊंगा। कालेज में रोहन पहुंचा मगर उस दिन रोहिनी नहीं आयी थी। रोहन बहुत परेशान हो गया क्योंकि रोहन के पास न तो उस लड़की का पता था ना ही वो किसी को वहां जानता था। रोहन उस शहर में नया था इसलिए वो वहां की किसी भी चीज के बारे में नहीं जानता था। रोहन कालेज में रोज इंतजार करता रहता मगर रोहिनी कालेज नहीं आ रही। वो बहुत परेशान होके कालेज के प्रधानाचार्य के पास जा पहुंचा और वहां से उस लड़की का पूरा पता मालूम कर लेता है। रोहन उसके घर जाना नहीं चहा रहा था क्योंकि उसे वहां से पता चलता है कि उसके पिता बहुत अमीर आदमी है। रोहन अमीर लोगों से बहुत नफरत करता था उसे लगता था कि अमीर लोग गरीब की बिल्कुल इज्जत नहीं करते मगर रोहन अपने प्रेम की खातिर उसके घर जा पहुंचता है और देखता है रोहिनी बहुत बीमार है और उसकी देखभाल नौकर कर रहे हैं। जिसे देख के वह हैरान रह जाता है और सोचता है इतने बड़े लोग और देखभाल उसके पिता की जगह नौकर कर रहे हैं। रोहिनी को देखता है कि वह चल नहीं पा रही है इतनी हालत बिगड़ी हुई है और उसे रोता हुआ देख के रोहन बहुत परेशान हो जाता है और रोहिनी के सर पे हाथ रख के ध्यान रखने को कहता है। रोहन उसे इस हालत में देख नहीं पाता है और कालेज में मिलने की कह के वहां से चला जाता है। रोहिनी के पिता एक नेता है जिन्हें अपनी इज्जत के सिवा कुछ दिखता नहीं है। रोहिनी की माता कुछ साल पहले चल वसी थी जो उसे बहुत प्यार करती थी। अब कोई घर में उसे प्यार नहीं करता जिसकी वजह से रोहिनी कभी खुश नहीं रहती है।वो बस अपनी मां का सपना पूरा करना चहाती है इसलिए वो किसी और चीज पे ध्यान नहीं देती है।
रोहिनी दस दिन बाद कालेज पहुंचती है जहां देखती है परेशान रोहन उसका इंतजार कर रहा है। रोहन उसका हालचाल पूछता है तो रोहिनी कहती है आप क्यों मेरी फिक्र करते हैं क्या लगती हूं मैं तुम्हारी फिर रोहिनी रोहन से बोलती है कि तुम मुझे कृपया मत देखा करो और मुझसे दूर रहा करो बोलकर चली जाती है।
रोहिनी कक्षा में पहुंचती है तो वहां उसे पता चलता है कि रोहन कितना परेशान था उसके कालेज न आने से और वो खाना भी नहीं खाता था। ये सब सुन के रोहिनी बहुत परेशान हो जाती है और सोचती है मैं रोहन से अब दूर रहूंगी क्योंकि वह अपने पिता के बुरे रूप से ड़रती है अगर उसके पिता को पता लगा तो रोहन के साथ कुछ भी हो सकता है। इसलिए सब सुन के सोच के अनसुना कर के कालेज से चल देती है जहां रास्ते में रोहन खड़ा मिलता है। रोहन उसे घर तक छोड़ने की बात करता है जिसे वो मना कर के चल देती है। रोहन रोकता है मगर वो चली जाती है।वह घर पहुंच के बहुत रोती है सोचती है कि मां होती तो सब बता देती अब अपने दिल की बात किससे करूं। रोहिनी पलंग पे लेट जाती है और मन ही मन उसे रोहन की फ़िक्र होने लगती है और कहीं न कहीं रोहन से उसे प्यार हो जाता है ।मगर रोहिनी अपने पिता से रोहन को बचाने की खातिर रोहन को अपने प्यार से अंजान रखना चहाती है। रोहिनी जब दूसरे दिन कालेज पहुंचती है जहां रोहन बहुत परेशान है उसे दुःखी देख के परेशान हो जाती है रोहिनी अकेले में ले जाकर उसे समझाती है और कुछ बातें करने लगती है जहां रोहन उसे बोल देता कि वह उससे बहुत प्यार करता है। रोहिनी उसके प्यार का जवाब नहीं देती है वहां से उठ जाती है और बोलती है कि उसके पिता बहुत ख़तरनाक हैं जो उसके साथ कुछ भी कर सकते हैं मगर रोहन ये सब नहीं सुनता है वो बस जानना चाहता है कि वो उसे प्यार करती है या नहीं बहुत जिद करता है और बोलता है मैं तुम्हारे बिना मर जाऊंगा जी नहीं पाऊंगा ये सुन के रोहिनी डर जाती है और हां कर देती है। अब रोज दोनों मिलने लगे रोहिनी बहुत खुश रहने लगी। रोहन एक दिन रोहिनी से शादी करने की बात बोलता है जहां वो रोहिनी के पिता से बात करने की बात कहता है ।
रोहिनी ये सुन के डर जाती है और सोचती है कहीं कुछ बुरा न हो जाए और रोहन से मना करती है मगर रोहन उसकी एक नहीं सुनता है और उसके घर पहुंच जाता है उसके पिता से उसका हाथ मांगने। रोहन उसके पिता के आगे हाथ जोड़कर उसका हाथ मांगता है ये सुन के रोहिनी के पिता रोहन को भिखारी कह कर शादी से इंकार कर देते हैं और चेतावनी देते हैं शहर छोड़कर जाने के लिए मगर रोहन वह शहर छोड़कर नहीं जाता है। रोहन मंदिर में शादी करने का फैसला कर लेता है जिसमें रोहिनी की भी हां होती है। पर भगवान को कुछ और ही मंजूर था जहां रोहिनी के पिता को सब पता चल जाता है और वे अपने कुछ लोगों के द्वारा रोहन पर वही मंदिर में हमला करवा देते हैं। और रोहिनी को खुद पकड़ कर ले जाते हैं और कालकोठरी में कैद कर देते हैं जहां से वह खुद निकल नहीं सकती है। उधर रोहन पर जो हमला कराया जाता है उसमें उसके दोनों हाथ एक पैर काट दिए जाते हैं। रोहन को ज़ख्मी हालत में छोड़ रोहिनी के पिता चले जाते हैं। रोहन को उसके पड़ोसी उसे अस्पताल में भर्ती कराते हैं जहां रोहन की जान बचाने की खातिर डाक्टर रोहन के दोनों हाथ एक पैर पूरे ही काट देते हैं। रोहन जब होश में आता है और देखता है कि उसके दोनों हाथ एक पैर नहीं हैं ये देख के वह बहुत रोता है और सोचता है क्यों ऊपर वाला इतना कष्ट दे रहा है। बचपन में मां बाप छीन लिए और अब हाथ पैर और उसे देखने रोहिनी तक नहीं आयी है ये सोच के और दुःखी हो जाता है क्योंकि रोहन को पता नहीं है कि रोहिनी किसी काल कोठरी में कैद कर दी गई है।रोहन अब रोहिनी से मिलना भी नहीं चहा रहा था क्योंकि वह सोच रहा था हाथ पैर नहीं हैं तो रोहिनी उसके साथ अब कैसे रहेगी उससे साथ रहने को कैसे कहेगा सोचता है रोहिनी का जीवन बर्बाद हो जाएगा इसलिए वह किसी और जगह रहेगा और वो अपना घर छोड़कर दूसरी जगह रहने लगता है। और अब रोहन चाहता है रोहिनी को कभी कुछ पता न लगे वह हमेशा खुश रहे। मगर रोहिनी किसी तरह नौकरों के सहारे उस कालकोठरी से बहार निकल जाती है वहां पहुंच जाती है जहां रोहन पहले रहता था जहां उसे रोहन नहीं मिलता है ये देख वह बहुत परेशान हो जाती है। रोहिनी पड़ोसियों से पता पूछ कर उस जगह पहुंच जाती है जहां रोहन होता है और देखती है कि रोहन चादर ओढ़े लेटा होता है और एक दोस्त रोहन के साथ में रह रहा होता है।रोहन कुछ बताना नहीं चाहता है और रोहिनी से बोलता है कि वह वहां से अपने घर चली जाए और पिता की बात मानकर शादी कर ले। मगर रोहिनी ये सब न सुन के रोहन के जिस्म पे हाथ रखती है जिससे रोहन उसे चिल्ला के हटा देता है मगर रोहिनी नहीं मानती है और हाथ जोड़कर बोलती वह सब को उसके लिए छोड़कर आयी है वह अब उसे खुद से जुदा न करें नहीं तो वह आत्महत्या कर लेगी और बहुत रोती है ये सुनकर रोहन परेशान होके सब बता देता है और अपनी चादर जिस्म से हटा देता है जिसे देख के रोहिनी जमीन पर गिर जाती है और रोहन के पैरों में गिर के फूट-फूटकर रोने लगती है और आंसू पोंछते हुए रोहन के और अपने रोहन को गले लगा लेती है कहती है रोहन तुम अब अकेले नहीं मैं हर कदम पे साथ हूं हर हाल में साथ हूं अब कभी छोड़कर तुम्हें नहीं जाऊंगी और दोनों बहुत रोते है और अभी शादी करने का फैसला ले लेते हैं।
रोहिनी रोहन को लेकर मंदिर पहुंच जाती है जहां रोहिनी के पिता आ जाते हैं जिन्हें देखकर रोहिनी उनके पैरों में गिर के अपने प्यार की भीख मांगती है और अपने पिता से कहती है कि वे अब इसी हाल में उन्हें जीने दें जिसे देख कर पिता की आंखें भर आती हैं और एक बार फिर उसे उससे शादी करने से मना करते हैं कहते हैं बिना हाथ पैर वाले आदमी के साथ वह कैसे पूरे जीवन भर रह लेगी कभी खुश नहीं रहेगी। मगर रोहिनी उसकी शादी रोहन से करा दें ये बात कहती है। ये सब देख कर पिता का दिल पिघल जाता है और सोचते हैं कि बिना हाथ पैर वाले आदमी के साथ पूरा जीवन गुजारने को तैयार है ये सब सोच के फिर खुशी-खुशी शादी करा देते हैं और वहां से चले जाते हैं। रोहिनी अपनी किस्मत पर बहुत रोती है फिर सोचती है अब रोना नहीं है अब रोहन अपने प्यार को पूरी जिंदगी खुश रखना है। रोहन के और अपने आंसू पोंछकर सबको छोड़कर खुशी-खुशी रोहन को अपने साथ लेकर अपने पिता से बहुत दूर चली जाती है।
सच्चे प्रेम का कोई अंत नहीं होता सच्चे प्रेम के आगे भगवान भी नतमस्तक हो गए तो इंसान तो कुछ भी नहीं है।
सच्चा प्रेम साथ कभी नहीं छोड़ता।🙏
नाम-पूजा ग्वाल
गांव-सहगवां नगरिया
जिला-पीलीभीत